कालपी

महेवा-आटा में प्रशासन का बुलडोज़र एक्शन

5 अवैध स्कूल सीज—नोटिस को ठेंगा, बच्चों के भविष्य से खुला खिलवाड़ बेनकाब

कालपी (जालौन )दो दिन पहले उठे सवालों और लगातार शिकायतों के बाद आखिरकार प्रशासन ने महेवा और आटा क्षेत्र में चल रहे अवैध स्कूलों पर करारा प्रहार करते हुए बड़ा एक्शन लिया है।

मंगलवार को शिक्षा विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 5 फर्जी विद्यालयों को सीज कर दिया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
सबसे बड़ा सवाल यही है—जब सालों से ये दुकान छाप स्कूल खुलेआम चल रहे थे, तब जिम्मेदार अफसर आखिर सो क्यों रहे थे?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, महेवा ब्लॉक के पीएस चंदेल विद्यालय (महेवा), बीकेवी विद्यालय (अभैदेपुर) और उड़ान भारती स्कूल (सिम्हारा चौराहा), वहीं आटा क्षेत्र के इंडियन पब्लिक स्कूल और विजडम एकेडमी पर ताला जड़ दिया गया। ये सभी स्कूल बिना मान्यता के वर्षों से संचालित हो रहे थे और नियम-कानून को खुलेआम ठेंगा दिखा रहे थे।

हैरानी की बात यह है कि इन विद्यालयों को पहले ही नोटिस देकर संचालन बंद करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संचालकों ने प्रशासनिक आदेशों को कागज का टुकड़ा समझते हुए धड़ल्ले से स्कूल चलाना जारी रखा। आरोप है कि ये स्कूल अभिभावकों से मोटी फीस वसूल रहे थे, जबकि न मान्यता, न योग्य स्टाफ और न ही बुनियादी सुविधाएं—सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा था।

मंगलवार को जब प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची तो स्कूलों में भगदड़ जैसे हालात बन गए। कई जगह संचालक और स्टाफ इधर-उधर भागते नजर आए, तो कहीं आनन-फानन में दस्तावेज जुटाने की कोशिश की गई। लेकिन इस बार प्रशासन पूरी तैयारी में था—एक-एक खामी पकड़ी गई और पांचों स्कूलों पर सीधा ताला जड़ दिया गया।

इस अभियान में नायब तहसीलदार मुकेश कुमार, खंड शिक्षा अधिकारी रंगनाथ चौधरी और पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने साफ कहा—अब जिले में अवैध स्कूलों का खेल नहीं चलेगा। जो भी नियमों को तोड़ेगा, उस पर सीधा एक्शन होगा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर खबर का असर है। वर्षों से शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही थी, लेकिन जैसे ही मामला उछला, प्रशासन को हरकत में आना पड़ा।

सवाल:
क्या यह कार्रवाई स्थायी होगी या फिर कुछ दिन बाद सब पहले जैसा हो जाएगा?
क्या इन स्कूलों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज?
आखिर इतने सालों तक किसके दम पर चल रहा था यह अवैध कारोबार?

निष्कर्ष:
महेवा और आटा में हुई यह कार्रवाई सिर्फ स्कूल सीज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे सेटिंग सिस्टम पर सीधा वार है। अगर अब भी बाकी अवैध स्कूलों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ होगा कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ—बस चेहरा बदला है।

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