रात 1 बजे देवदूत बनकर पहुंचे धर्मेंद्र याज्ञिक: रक्तदान से बची मां-बच्चे की जान, जालौन में इंसानियत की मिसाल”

रिपोर्ट- राजेन्द्र सिंह सेंगर
जालौन कहते है इंसान के अंदर ईश्वर वास करता है उसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं जालौन नगर के धर्मेंद्र याज्ञिक आपको मै जानता तो नहीं न कभी मिला हु पर आप इंसान गजब कमाल के है
रात्रि 1 बजे इंसानियत ग्रुप के पास एक महिला का फोन आता है कि उसकी डिलेवरी होनी खून कम होने के कारण नहीं हो पा रही है जिला अस्पताल और मेडिकल कालेज वालो ने रिफर कर दिया है खून की व्यवस्था हो नही पा रही है तभी इंसानियत ग्रुप महिला के लिए रात्रि मदद मांगता हैं और सारे ग्रुप में A+ बल्ड मांगता है महज 10 मिनट के अन्दर ही अंजान एक लोगो का मैसेज आता है मेरा A+ है मै चला जाऊंगा पर मैं जालौन में रहता हु उरई रात्रि कैसे जाएंगे रात्रि ही महिला के घर वाले उन्हें लेने जाते है उनके माता पिता पत्नी और 18 महीने की बच्ची है उन सबसे अनुमति लेकर धर्मेंद्र जालौन से उरई आते है अपना खून देते है आज के इस कलयुग में जब अपना अपने के काम खास रिश्तेदार परिवार एक दूसरे के काम नहीं आते वही इंसानियत धर्मेंद्र जैसे भाइयों के अन्दर जिंदा है जो रात्रि अपनी नींद घर बार छोड़कर किसी पराये अपरिचित को अपना खून देते है रात्रि 3 बजे अपने घर जाते है
जिंदाबाद इंसानियत ग्रुप जिंदाबाद धर्मेंद्र भाई जुड़ते रहे आप सब मदद करते रहे देखते रहे एक दूसरे के काम आते रहे


