सच्ची श्रद्धा बिना दिखावा के साथ की गई भक्ति से जीवन के साथ मृत्यु भी संवर जाती -पंo सत्यम व्यास
अनुराग श्रीवास्तव के साथ बबलू सिंह सेंगर महिया खास
जालौन। श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन ग्राम कैंथ में भागवताचार्य संतोष द्विवेदी ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन किया। इस दौरान कालिया मान मर्दन एवं गोवर्धन पर्वत की कथा का भी श्रवण कराया गया।
ग्राम कैंथ में हनुमान मंदिर पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन भागवताचार्य पं. संतोष द्विवेदी ने बताया कि श्रीकृष्ण का जन्म वासुदेव और देवकी के गर्भ से कारगार में हुआ था। वासुदेव ने श्रीकृष्ण को गोकुल में यशोदा के यहां दे दिया था, जहां यशोदा ने अपने लल्ला कान्हा को बड़े ही लाड़ प्यार से पाला। भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही नटखट थे। जितना यशोदा मैया और नंद लाला उनके नटखट अंदाज से परेशान थे, उतना ही वहां के गांव वाले भी। कृष्ण जी अपने मित्रों के साथ मिलकर गांव वालों का माखन चुरा कर खा जाते थे, जिसके बाद गांव वाले उनकी शिकायत मैया यशोदा के पास लेकर पहुंच जाते थे। इस वजह से उन्हें अपनी मैया से डांट भी खानी पड़ती थी। एक बार श्रीकृष्ण अपने मित्रों के साथ यमुना नदी के किनारे गेंद से खेल रहे थे। अचानक गेंद युमना नदी में चली गई और बाल गोपल के सारे मित्रों ने मिलकर उन्हें ही नदी से गेंद लाने को भेज दिया। बाल गोपाल भी एकदम से कदम्ब के पेड़ पर चढ़ कर यमुना में कूद गए। वहां उन्हें कालिया नाग मिला। श्रीकृष्ण ने अपने भाई बलराम के साथ मिलकर जहरीले कालिया नाग का वध कर दिया। भगवान श्रीकृष्ण का राधा जी के साथ एक खास रिश्ता था, वहीं गांव की गोपियों से भी उनकी खूब बनती थी। श्रीकृष्ण की बंसी की धुनें राधा को खूब भाती थीं। पूरे गांव में राधा-कृष्ण की रासलीलाएं खूब चर्चित हुईं। इसके साथ ही उन्होंने गोवर्धन पर्वत की लीला का भी वर्णन किया। इस मौके पर पारीक्षित मुलायम सिंह गुर्जर, आशीष, मनीष, मुन्ना, राजा, जितेंद्र सिंह, प्रदीप आदि मौजूद रहे।



