जालौन
अनिल त्रिपाठी महाराज ने ध्रुव चरित्र का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति, तप और दृढ़ संकल्प का समझाया। महत्व

जालौन । औरैया रोड स्थित सतीशचंद्र मिश्रा के आवास पर आयोजित साप्ताहिक श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास अनिल त्रिपाठी महाराज ने ध्रुव चरित्र का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भक्ति, तप और दृढ़ संकल्प का महत्व समझाया।
तीसरे दिन की कथा में अनिल त्रिपाठी महाराज ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि ध्रुव की कथा मानव जीवन में अडिग विश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण की अद्भुत मिसाल है। धु्रव को अल्प आयु में ही अपमान और पीड़ा का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने निराश होकर भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा। माता सुनीति के मार्गदर्शन में ध्रुव ने भगवान विष्णु की आराधना का संकल्प लिया और कठोर तपस्या प्रारंभ की। उनकी तपस्या इतनी कठिन थी कि देवता भी विचलित हो उठे, लेकिन ध्रुव अपने लक्ष्य से डिगे नहीं। ध्रुव ने बाल्यावस्था में ही यह सिद्ध कर दिया कि यदि मन में दृढ़ विश्वास और ईश्वर के प्रति आस्था हो, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं रहता। भगवान विष्णु ने ध्रुव की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें दर्शन दिए। आज भी ध्रुव को तारे के रूप में अटल और स्थिर माना जाता है। इस मौके पर पारीक्षित सतीशचंद्र मिश्रा, प्रभा देवी, अरविंद मिश्रा, ऊषा देवी, शरद मिश्रा, नारायण मिश्रा, शिवम मिश्रा, पारष मिश्रा, आशा देवी, प्रीति, सुरूचि देवी, अंकित कुमार, कंचन देवी आदि मौजूद रहे।



