जालौन

नदीगांव खण्ड के ग्राम तीतरा मे सम्पन्न हुआ विराट हिन्दू सम्मेलन

वसुधैव कुटुबंकम का भाव हिन्दू धर्म मे निहित-जिला प्रचारक शिवम जी

हमारी भाषा ,वेषभूषा,भोजन, भ्रमण,भारतीय संस्कृति के अनुकूल हो- सह जिला कार्यवाह भूपेंद्र जी
नदीगांव खंड के ग्राम तीतरा मे हुये हिन्दू सम्मेलन की अध्यक्षता पूज्य श्री रामशरण दास जी महाराज गिद्धौसा मंदिर ने की मुख्य वक्ता के रुप मे जिला प्रचारक शिवम जी भाई साहब एवं सह जिला कार्यवाह श्रीमान भूपेंद्र जी भाईसाहब रहे।।
कार्यक्रम का प्रारंभ भारतमाता एवं प्रभु श्री रामजी के चित्र पर दीप प्रज्वलित कर किया गया कार्यक्रम में देशभक्ति से ओतप्रोत विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी रही तत्पश्चात जिला प्रचारक शिवम जी ने अपने उद्बोधन में कहा हमारे देश की सांस्कृतिक विरासत बहुत ही वैभवशाली रही है अनेक आक्रांता आए हिंदू सभ्यता को छिन्न भिन्न करने का कार्य किया लेकिन राष्टभक्ति से उत्प्रोत हमारे बंधु बंधुओ ने उनकी किसी भी चल को सफल नहीं होने दिया इतिहास को तोड़ मरोड़ कर बताया गया इतिहास में अकबर महान का वर्णन मिलता है लेकिन अकबर से लोहा लेकर अपने पौरुष साहस से हम सभी को परिचित कराने वाले परम प्रतापी महाराणा प्रताप का वर्णन कम मिलता है,लेकिन आज जब हम अपने देश के वास्तविक इतिहास को देखते हैं तो महाराणा प्रताप हिंदवी स्वराज की स्थापना करने वाले वीर शिवाजी अंग्रेजों से लोहा लेने वाली रानी लक्ष्मीबाई के वीरता से ओतप्रोत कहानियों को हम पढ़ते हैं और उनसे हम प्रेरणा लेते हैं कि जब भी राष्ट्रहित में बलिदान करना पड़े तो हमें करना चाहिए उन्होंने कहा हमें अपने महापुरुषों से प्रेरणा लेकर अपने देश को पुनः परमवैभव की ओर ले जाने का अपने कृतित्व के माध्यम से प्रयास करना चाहिए।।
उन्होंने कहा वसुधैव कुटुंबकम के सिद्धांत ने भारत के सामाजिक और सांस्कृतिक तानेबाने को प्रभावित किया है इस विचार ने एक ऐसी संस्कृति को जन्म दिया जो विविधता का सम्मान करती है और विभिन्नता में एकता के महत्व को समझती है हम हिंदुओं के राष्ट्र के प्रति समर्पण का आधार वसुधैव कुटुंबकम की ही विचारधारा रही है
सह जिला कार्यवाह भूपेन्द्र जी ने कहा हमे अपनी भाषा वेशभूषा खानपान घूमने के स्थान भारतीय संस्कृति के अनुकूल रखना चाहिये हमे अपने पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना है देश के संसाधनों का उचित प्रयोग करना है विश्व के अंदर सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि कहीं है तो वह हमारे देश के पास है इसीलिये भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है हमें अपने खेतों मे अत्यधिक पेस्टीसाइट के उपयोग से बचना है ,जिससे खेतों की उर्वराशक्ति बनी रहे अनावश्यक रुप से वृक्षों को वृक्षो को काटना नहीं राष्ट्रहित मे पर्यावरण की सुरक्षा करनी चाहिये।
कार्य क्रम के अंत मे सभी को पूज्य रामशरण दास जी महाराज का आशीर्वचन प्राप्त हुआ समाज सेवी रामकुमार सोनी जी मोहित परिहार जी रामजी पाल सौरभ मौर्य सहित मंडल के बंधु बांधव उपस्थित रहे।।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button