उरई

मददगार हो तो इंसानियत ग्रुप के संस्थापक जैसा नाम है सुमित प्रताप सिंह

राजेन्द्र सिंह सेंगर

उरई आइए बताते है आपको पूरा वाक्य एक अंजान लड़का जो जिला प्रतापगढ़ जिला के किसी गांव का रहने वाला है नाम शिवम जयसवाल उम्र है 10 साल
पिता जब शुभम दो साल के थे तब खत्म हो गए है मां को लकवा मारा है स्थिति बहुत खराब है परिवार की उसकी बहन सोनी जयसवाल को दिल में छेद होने जैसी बीमारी हो जाती है कोई भी हॉस्पिटल उसे भर्ती नहीं करता है बच्चा हर जगह मदद की लगाता है गुहार बानर सेना का देवदूत आगे आकर कराता है भर्ती प्रयागराज के किसी हॉस्पिटल में अगले ही दिन डॉक्टर मना कर देते है कि इलाज नहीं हो पाएगा इसे कही बाहर कानपुर लखनऊ दिल्ली ले जाओ साधन और पैसा न होने के कारण परिवार था परेशान तब मैदान में कूदता है इंसानियत ग्रुप और 5 मिनट के अन्दर ही उसको फ्री में करा देता है एंबुलेंस जिससे वो लोग कानपुर कार्डियो लॉजी आते है जिधर सुमित प्रताप सिंह डायरेक्टर और उनके सहयोगी आशीष से बात करके तुंरत करा देते है भर्ती डॉक्टर का कहना होता है भगवान भरोसे है उसका जीवन हालत बहुत खराब है फिर भी सुमित के आग्रह पर लड़की होती है भर्ती इलाज होता है शुरू इधर बानर सेना और इंसानियत ग्रुप बच्चे के लिए अभियान चलाकर पैसा इक्कठा कर रहा है देश भर से इंसानियत ग्रुप के सदस्य शिव वर्मा जो जॉब करते है फाइनेंस में वो अपने सारे काम छोड़कर बच्चे के पास रहते है भोजन ले जाते अपने घर से वही मुन्ना चौहान कानपुर में बच्चे को कपड़ा कमरा दिला देते है बढ़िया कटिंग करा देते है बच्चे का पास फोन न होने पर बच्चा कहता है कि मुझे बीवो या ओप्पो को फोन दिला दो इंसानियत ग्रुप एक अंजान लड़के को दिला देते है नया फोन खुद जाकर सुमित प्रताप बच्चे से मिलते है उसे फोन देते है उसकी बहन मां का स्वास्थ देखते है देखिए ईश्वर की कृपा जो लड़की का जीवन समाप्त की ओर था आज वो 70% भगवान की कृपा से इंसानियत ग्रुप बानर सेना की ताकतवर भरपूर मदद से स्वस्थ है लगातार मददगार मदद कर रहे है
मददगार हो तो इंसानियत ग्रुप जैसा

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