
जालौन (उरई) ।वन विभाग प्रतिबंधित धार्मिक व चिकित्सकीय पेड़ों की अवैध कटान पर रोक नहीं लगा पा रहा है ।ग्रामीण क्षेत्र के साथ नगर क्षेत्र के आसपास प्रतिबंधित पीपल, नीम, शीशम के पेड़ों की धडल्ले से कटान हो रही है तथा नगर में चुंगी नंबर 4 व बंगरा मार्ग पर स्थित आरा मशीनों पर उनकी चिरायी की जा रही है। इसके बाद भी विभाग मूकदर्शक बना हुआ।
पीपल के वृक्ष धार्मिक मान्यता दी जाती है तथा उसमें शनिदेव व लक्ष्मी का वास माना जाता है ।इसके साथ ही आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से अत्यंत उपयोगी और औषधीय माना गया है, यही कारण है कि इसके कटान पर रोक लगाई गई है। यही हाल आम के वृक्ष का भी है। शीशम के वृक्ष की लकड़ी भी उपयोगी है। लेकिन वन विभाग की ढिलाई और मिलीभगत के चलते कई क्षेत्रों में लकड़ी माफिया सक्रिय हैं। वे पुराने परमिट को दिखाकर लंबे समय तक कटान और बिक्री करते रहते हैं। स्थानीय नागरिकों ने आरा मशीन पर चल रही चिराई पर सवाल खड़े किए हैं। नगर में संचालित आरा मशीनों पर प्रतिबंधित लकड़ी की चिराई लगातार जारी है। बंगरा रोड स्थित चुंगी नंबर 4 के पास आरा मशीन पर प्रतिबंधित पेड़ों की लकड़ी की चिराई की जा रही है। गुरुवार को दोपहर में नगर के मोहल्ला पुरानी नझाई में संजय गुप्ता उर्फ रामू के घर के पास पीपल का प्राचीन पीपल का पेड़ मंदिर के पास लगे पीपल के पेड़ को कुछ लोग मशीन लेकर आ गये तथा उसे काटने लगे ।पीपल के पेड़ काटने पर जब लालजी गुप्ता आदि ने विरोध किया। मोहल्लावासियों के विरोध के बाद पीपल का पेड़ काट रहे लोग भाग गये तथा काटी गयी लकड़ी मौके पर छोड़ गये। लालजी, विनय, जसवंत आदि ने बताया कि इन प्रतिबंधित पेड़ की लकड़ियों की बाजार में अच्छी कीमत मिलने के कारण इसकी मांग अधिक रहती है, और इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग अवैध तरीके से व्यापार कर रहे हैं। लोगों ने डीएम से मांग की है कि इस मामले की गंभीरता से जांच कराई जाए और पुराने परमिटों की आड़ में हो रही अवैध कटान पर तत्काल रोक लगाई जाए।



