कालपी जालौन आज़ हम बात कर रहे हैं जनपद जालौन के कालपी के हाथ कागज़ उधोग की जिसने विश्व पटल पर अपनी पहचान बनाई
लेकिन आज़ कालपी में उपेक्षा के कारण अस्तित्वहीन होने की कगार पर हाथ कागज उद्योग, रोजगार की तलाश में दूसरे प्रांतों में कूच कर रहे लोग
बाजार में मांग न होने की वजह से हाथ कागज के व्यवसाय में ग्रहण लगने लगा है। इससे लगभग पचास इकाइयां बंद हो गई है
एक दशक पहले कालपी में छोटी-बड़ी लगभग 150 हाथ कागज की इकाइयां संचालित होती थीं, जिससे लगभग 7 हज़ार श्रमिकों को रोजगार मिलता था। लेकिन अब बमुश्किल 100 श्रमिक ही कागज फैक्ट्रियों में कार्यरत हैं। अन्य श्रमिक दूसरे प्रान्तों में रोजगार की तलाश में कूच कर चुके हैं।
ज्यादातर कागज उद्यमियों ने उद्यमियों ने अपनी-अपनी कागज फैक्ट्रियों के परिसर में गेस्ट हाउस तथा विवाह गृह बना लिया है।
उधमियों की अगर मानें तो हाथ कागज को सबसे अधिक जरूरत मार्केटिंग की हैं। जब तक माल की पर्याप्त बिक्री नहीं होगी तब तक हाथ कागज उद्योग विकसित नहीं हो पायेगा
हाथ कागज की प्रमुख समस्याओं में जीएसटी की दरें 12 प्रतिशत हैं। इससे उद्यमियों की कमर टूट गई है। अगर जीएसटी की दर को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया जाए तो उद्यमियों को लाभ होगा।
हाथ कागज उद्योग के कारीगरों के मुताबिक सरकार की ओर से एक जिला एक उत्पाद योजना लागू की गई है। लेकिन बैंकों की मनमाने कारगुजारियों के चलते यह योजना सफल नहीं हो पा रही है। धरातल पर कागज उद्यमियों को इस योजना का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इससे कागज उद्योग अंतिम सांसें भर रहा है। अगर सरकार ने इस और जल्द ही ध्यान नहीं दिया तो आगामी समय में हस्त कागज उद्योग का नगर से नामों निशान मिट जाएगा
