
बबलू सेंगर महिया खास
जालौन। भाद्रपद मास की सप्तमी को महिलाओं ने संतान सप्तमी का पर्व मनाया और पुत्रों की दीर्घायु और स्वास्थ्य की कामना करते हुए भगवान शिव व पार्वती की पूजा अर्चना की।
बुंदेलखंड में महिनाओं के बीच संतान सप्तमी के व्रत का बहुत महत्व है। विवाहित महिलाएं अपनी संतान की भलाई के लिए भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को यह व्रत रखती हैं। यह व्रत भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है। संतान सप्तमी के पर्व पर महिलाओं ने संतान की खुशहाली और दीर्घायु के लिए यह व्रत रखा।
महिलाओं ने निराहार व्रत रखकर, दोपहर को चौक पूरकर चंदन, अक्षत, धूप, दीप, नैवेध, सुपारी और नारियल आदि से शिव- पार्वती की पूजा की। साथ ही संतान की रक्षा की कामना करते हुए भगवान भोलेनाथ को कलावा अर्पित स्वयं इसे धारण किया और व्रत की कथा सुनी। संतान सप्तमी को लेकर साध्वी किशोरीजी ने बताया कि संतान सप्तमी के दिन भगवान सूर्य, माता पार्वती और भोले शंकर की विधि-विधान पूर्वक पूजा-आराधना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन का व्रत करने से संतान की प्राप्ति होती है और संतान की आयु लंबी होती है। इसके साथ ही संतान के सभी दुखों का नाश होता है। इसलिए सभी विवाहित महिलाओं को यह व्रत अवश्य करना चाहिए। वहीं, संतान सप्तमी पर महिलाओं ने सुबह से ही छोटी माता मंदिर बड़ी माता मंदिर में पहुंचकर पूजा अर्चना की। इस दौरान मिट्टी के गौरा पार्वती भी खरीदकर महिलाएं पूजा अर्चना के लिए घरों पर ले गई।